CHRISTIAN ARTICLES AND LITERATURE
(मसीही उल्लेख तथा साहित्य)

A-42 धर्म, परमेश्वर और मनुष्य का रिश्ता!
मनुष्य की सबसे बेशकीमती चीजों में से एक उसके रिश्ते होते हैं। कुछ रिश्ते मनुष्य के जन्म लेते ही बन जाते हैं जैसे माता-पिता, भाई-बहन इत्यादि, और कुछ रिश्ते वह अपने जीवन के सफर में बनाता है जैसे दोस्त, पति, पत्नी इत्यादि। वह इन्हीं रिश्तो के साथ अपने सुख-दुःख बांटता है l
परंतु जब हम बात करते हैं सृष्टिकर्ता परमेश्वर की, जो इन सभी रिश्तो का आधार है, तब क्या मनुष्य यह जानता है कि परमेश्वर से भी रिश्ता बनाया जा सकता है? क्या मनुष्य उससे अपना रिश्ता बनाना जरूरी समझता है? क्या मनुष्य के बनाए हुए धर्म उसे परमेश्वर के साथ रिश्ता बनाने के बारे में कुछ सिखाते हैं? अगर हां तो क्या वह धर्म परमेश्वर के साथ रिश्ता बनाने में कामयाब हो सके हैं? नहीं!
सिर्फ बाइबल ही, जो परमेश्वर का दिया हुआ वचन है, हमें परमेश्वर के साथ रिश्ता बनाने के बारे में सही रीति से सिखाती है। बाइबल हमें सिखाती है कि संसार के आरंभ में मनुष्य का सबसे पहला रिश्ता परमेश्वर के साथ था। बाइबिल हमें सिखाती है कि मनुष्य का सबसे महत्वपूर्ण रिश्ता अपने सृष्टिकर्ता परमेश्वर के साथ होना चाहिए। बाइबिल हमें यह भी सिखाती है कि कैसे मनुष्य ने अपने पापमय स्वभाव के कारण आरंभ में ही परमेश्वर से अपना रिश्ता तोड़ लिया था, और कैसे परमेश्वर ने अपने प्रेम के कारण मनुष्य से दोबारा रिश्ता स्थापित करने के लिए अपने इकलौते पुत्र यीशु मसीह का बलिदान दिया।
संसार का कोई भी मनुष्य जब अपने पापों से मन फिराकर प्रभु यीशु मसीह के बलिदान पर विश्वास करके, उसे अपना एकमात्र उद्धारकर्ता स्वीकार कर लेता है, तब वह सही मायनों में अपने धर्म से निकलकर परमेश्वर के साथ अपने रिश्ते का आनंद उठा पाता है। परमेश्वर और मनुष्य के रिश्ते के बारे में और जानने के लिए ये वीडियो देखें ।

A-38 शैतान की युक्तियां - आत्मिक युद्ध।
हम जानते हैं कि प्रभु यीशु मसीह को अपना एकमात्र उद्धारकर्ता स्वीकार करना एक मनुष्य के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण फैसला होता है परंतु सफल मसीही जीवन जीने के लिए प्रभु यीशु मसीह को उद्धारकर्ता स्वीकार करने के बाद अपने जीवन में उसकी इच्छाओं को पूरा करना होता है। सफल मसीही जीवन जीने के लिए पवित्र शास्त्र बाइबल एक मसीही को आत्मिक युद्ध लड़ने के लिए प्रोत्साहित करती है।
लेकिन क्या होता है आत्मिक युद्ध?
आत्मिक युद्ध सांसारिक युद्ध की तरह मनुष्यों के खिलाफ नहीं परंतु शैतान और उसकी दुष्ट आत्माओं के खिलाफ होता है।
शैतान की सबसे बड़ी कामयाबी एक मनुष्य को प्रभु यीशु मसीह को, उसका उद्धारकर्ता स्वीकार करने से रोकने में होती है। जब शैतान इसमें कामयाब नहीं हो पाता तो वह अपने दूसरे लक्ष्य की तरफ दौड़ता है, जो होता है उस मसीही को प्रभु यीशु मसीह के राज्य के लिए इस्तेमाल होने से रोक कर उसका मसीही जीवन असफल करना। शैतान जीवन भर उस मसीही को रोकने के लिए अपनी युक्तियों का इस्तेमाल करता है।
एक मसीही सिर्फ और सिर्फ परमेश्वर के वचनों के द्वारा, परमेश्वर के हथियार बांधकर ही आत्मिक युद्ध लड़ सकता है और शैतान की युक्तियों से बच सकता है। शैतान की युक्तियों और आत्मिक युद्ध के बारे में और जानने के लिए ये वीडियो देखें।
https://youtu.be/YI9WRcOC2-8
https://youtu.be/aB8A2owwmZE
https://youtu.be/7nVSn5nWzm4

A-32 आपकी संगति अच्छी है या बुरी?
इस दुनिया में विभिन्न प्रकार के लोग होते हैं जिन्हें सामाजिक मापदंड के आधार पर अच्छे या बुरे चरित्र वाला कहा जाता है l परंतु सही मायनों में, पवित्र शास्त्र बाइबल के आधार पर चलना ही अच्छा चरित्र होता है क्योंकि जब एक मनुष्य अपने पापों से मन फिराकर, प्रभु यीशु मसीह के बलिदान पर विश्वास करके, बाइबल के वचनों पर चलने के लिए तैयार हो जाता है, तब परमेश्वर द्वारा दिया गया पवित्र आत्मा उस मनुष्य के चरित्र को बदलने लगता है और उसे परमेश्वर के चरित्र में ढालने लगता है। अब क्योंकि उस मनुष्य के अंदर परमेश्वर के चरित्र के साथ-साथ आदम से मिला पाप का स्वभाव भी होता है, इसलिए कई बार जब वह मसीही वचन से दूर हो जाता है तो दुनिया की तरफ आकर्षित होने लगता है। बाइबल स्पष्ट रूप से सिखाती है कि एक मसीही को अविश्वासियों की बुरी संगति में नहीं चलना चाहिए। हालांकि यहां संगति न करने का मतलब यह नहीं है कि किसी भी अविश्वासी से बात या दोस्ती नहीं करनी चाहिए, लेकिन बाइबल सिखाती है कि एक मसीही को अविश्वासीयों की उन बुरी आदतों से सतर्क रहना चाहिए जहां उसे बाइबल के मूल्यों के साथ समझौता करना पड़े, फिर चाहे वह कितना ही प्रिय दोस्त या परिवार वाला क्यों न हो – क्योंकि उनके साथ अधिक घुलने-मिलने से मसीही के अन्दर बसा आदम के पाप का स्वभाव उस पर हावी होने लगता है और उसकी आत्मिक उन्नति रुक जाती है, और बहुत जल्दी वो वापिस पाप में फिसलने लगता है l इस विषय को विस्तार से समझने के लिए ये वीडियो देखें।
https://youtu.be/Lj51cPxWpjE

A-27 आपके लिए परमेश्वर की योजना!
परमेश्वर के सत्य वचन पवित्र शास्त्र बाइबल के आधार पर - जिस दिन से पहले मनुष्य आदम ने परमेश्वर की आज्ञा ना मानकर इस संसार का पहला पाप किया, उसी दिन से मनुष्य में पाप का स्वभाव आ गया जिसके कारण उसकी संगति परमेश्वर से टूट गई और वह परमेश्वर के मार्ग से हटकर अपने ही मार्ग पर चलने लगा। इसी कारण आज के मनुष्य की कल्पनाएं परमेश्वर की योजनाओं से मेल नहीं खाती। आज का मनुष्य परमेश्वर को छोड़ संसार की अस्थाई उपलब्धियों पर मन लगाता है जो उसके जीवन के साथ ही समाप्त हो जाती हैं। लेकिन बाइबल हमें सिखाती है, कि परमेश्वर की योजनाएं मनुष्य की योजनाओं से बहुत उत्तम होती हैं। परमेश्वर की योजनाओं पर चलने वाला मनुष्य शारीरिक जीवन का आनंद भी उठाता है, और अनंतकाल की उपलब्धियां भी प्राप्त करता है। लेकिन यहां सबसे बड़ा प्रश्न ये है कि “मनुष्य अपने जीवन के लिए परमेश्वर की योजनाओं को कैसे जान सकता है?” ये तभी संभव है जब मनुष्य अपने पापों से मन फिराकर प्रभु यीशु मसीह के बलिदान पर विश्वास करे और उसके बताए मार्ग बाइबल के वचनों पर चले – ताकि सच्चे परमेश्वर से उसका एक संबंध बन सके l अपने जीवन में परमेश्वर की योजना को समझने के लिए ये सभी वीडियो देखें।

A-22 मसीहियों का उठा लिया जाना - रैपचर
पवित्र शास्त्र बाइबल परमेश्वर का ऐसा सत्य वचन है जो ना सिर्फ हमें भूतकाल और वर्तमान काल के बारे में, बल्कि हमें भविष्य में होने वाली आलौकिक घटनाओं के बारे में भी बताता है, जिनमें से एक है अंतिम समय में प्रभु यीशु मसीह के द्वारा सभी मसीहियों का बादलों में उठा लिया जाना – जिसको (रैपचर – RAPTURE) भी कहा जाता है। जहां एक तरफ आज का आधुनिक समाज परमेश्वर से ज्यादा विज्ञान पर भरोसा करता है, वहीं दूसरी तरफ एक मसीही की सबसे बड़ी आशा है प्रभु यीशु मसीह का बादलों पर आना और मसीहियों को येशु से मिलने के लिए बादलों में उठा लिया जाना l एक मसीही को यह नहीं भूलना चाहिए कि जब हम बात करते हैं सृष्टिकर्ता परमेश्वर की जिसने सब कुछ बनाया है, तो अलौकिक घटनाओं का होना कोई बड़ी बात नहीं है। परमेश्वर के द्वारा मसीहियों के उठा लिए जाने के बारे में और जानने के लिए ये वीडियो देखें।

A-18 यीशु कठिनाइयों में भी हमारे साथ है!
सुख और दुख मनुष्य के जीवन का हिस्सा है इसीलिए मनुष्य के जीवन में कठिनाइयों का आना आम बात है, फिर चाहे वह मसीही हो या गैर मसीही। लेकिन पवित्र शास्त्र बाइबल हमें यह सिखाती है कि एक मसीही के जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी यीशु मसीह हमेशा उसके साथ रहता है और उन परिस्थितियों से बाहर निकलने में उसकी मदद करता है। प्रभु यीशु मसीह के मार्ग पर चलकर एक मसीही अपने जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी आनंदित रहता है। जीवन की परेशानियों और निराशा से बाहर निकलने के विषय में ये वीडिओ देखें।

A-17 येशु सब रिश्तों से ऊपर है!
पवित्र शास्त्र बाइबल में लिखे हुए परमेश्वर के वचन ऐसा सत्य हैं जो दुनिया की कोई भी शिक्षा या धर्म नहीं सिखाते। जहां एक तरफ दुनिया की शिक्षा और ज्ञान मन को भाने वाली बातें करते हैं वहीं दूसरी तरफ बाइबल का उद्देश्य मनुष्य को सत्य का बोध कराना है। बाइबल हमें कई जगहों पर यह बताती है कि एक मसीही के जीवन में प्रभु यीशु मसीह(जो एकमात्र परमेश्वर है) से बड़ा स्थान किसी का नहीं होना चाहिए। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि एक मसीही अपने सारे रिश्तो को त्याग दें, बल्कि अपनी सभी पारिवारिक जिम्मेदारियों को पूरा करना तो एक मसीही का कर्तव्य है। अनंत कालीन परमेश्वर को अपने जीवन में कैसे प्राथमिकता दी जाए यह जानने के लिए यह video देखिए।
https://youtu.be/F2a6MPTzu3M

A-8 सुसमाचार का प्रचार नित्य करें
आम तौर पर हमारे दिन-प्रतिदिन के जीवन में हम एक दूसरे के साथ समाचारों का आदान-प्रदान करते हैं। कभी वे समाचार खुशियां लाते हैं तो कभी दुख। पवित्र शास्त्र बाइबल के अनुसार मनुष्य जाति के उद्धार के लिए प्रभु यीशु मसीह का इस दुनिया में जन्म लेना, क्रूस पर अपना बलिदान देना, और तीसरे दिन जीवित हो जाना इस दुनिया का सबसे बड़ा खुशी का समाचार है जिसे हम सुसमाचार कहते हैं, इसलिए एक मसीही के लिए जरूरी है कि जैसे बाइबल का सुसमाचार उसे मिला वैसे ही वह दूसरों को भी प्रचार करें। सुसमाचार का प्रचार कैसे किया जाए यह जानने के लिए हमारे यह videos देखें।

A-5 शरीर की अभिलाषाएं !
मनुष्य का जीवन हमेशा शारीरिक अभिलाषाओं से घिरा रहता है। इसलिए जरूरी है एक मसीही के लिए परमेश्वर के वचन के आधार पर अपना जीवन बिताना।
जरूरी है जैसा पुत्र यीशु मसीह आज्ञाकारी था वैसे ही हम भी परमेश्वर के लिए आज्ञाकारी बने।मनुष्य की अभिलाएं, और उनसे कैसे बचा जाए - इस विषय को गहराई से समझने के लिए ये videos जरूर देखें
https://youtu.be/EdM30T-ZaiE

A-4 हमारा जीवन क्रूस पर होना चाहिए !
प्रभु यीशु मसीह द्वारा दिए गए क्रूस पर बलिदान की कोई तुलना नहीं की जा सकती। क्रूस का बलिदान हमें दर्शाता है कि कैसे परमेश्वर ने जगत के लोगों के लिए अपने आप को शून्य कर दिया। इसलिए जरूरी है कि यीशु मसीह के रास्ते पर चलने के लिए हम भी अपने जीवन को परमेश्वर के लिए शून्य करें, अपने आप का इनकार करें और हमारा रोज का जीवन परमेश्वर की इच्छा पर और वचन के आधार पर चले। - क्रूस के जीवन को समझने के लिए ये विडियो देखिये - https://www.youtube.com/watch?v=ss_nC_K-V_E

A-3 : प्रार्थना - PRAYER
मसीही जीवन का मुख्य आधार - प्रार्थना l सच्चे हृदय से की गई प्रार्थना दर्शाती है एक मसीही का सच्चा विश्वास और येशु के प्रति समर्पित जीवन l अगर एक मसीही का जीवन निःस्वार्थ प्रार्थना पर निर्भर है, तो उसका मतलब है कि वो मसीही प्रभु की इच्छा में जी रहा है l प्रार्थना के विषय में YouTube पर हमारे ये सभी सन्देश देखकर अपने "प्रार्थना- जीवन को बढ़ाइए" - प्रार्थना (PRAYER) से सम्बंधित सभी सन्देश -
https://www.youtube.com/watch?v=hNRvseGk_SY&t=25s
https://www.youtube.com/watch?v=NJpSHJKaYRM&t=693s
https://www.youtube.com/watch?v=hgbETycrcvY&t=111s
https://www.youtube.com/watch?v=-9IuTWSXkQg&t=557s –
https://www.youtube.com/watch?v=LYpgPGrkgng&t=883s - और - आपको हमारे 380videos में बाइबिल के बहुत से सवालों के जवाब मिल जायेंगे - हमारे सभी विडियो देखने के लिए CHANNEL LINK (चेनल लिंक) -
https://www.youtube.com/channel/UCodyYrtR4YgIqzj8AjmZ6jg/videos